उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने युवाओं को राहत देते हुए हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के महाविद्यालयों को असंबद्ध करने के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले से जहां हजारों विद्यार्थियों को राहत मिली है। वहीं कॉलेजों ने भी सुकून की सांस ली है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार डीएवी कॉलेज प्रबंधन ने दस अशासकीय महाविद्यालयों को असंबद्ध करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सोमवार को मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने गढ़वाल विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के असंबद्धता के फैसले पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि डीएवी सहित 10 अशासकीय डिग्री कॉलेजों को इसी सत्र से विश्वविद्यालय कार्यपरिषद ने असंबध करने का निर्णय लिया गया था। जिसके बाद जहां हजारों छात्रों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई थी तो वहीं विवि से जुड़े 72 प्राइवेट कॉलेजों की संबद्धता पर भी तलवार लटकी थी। कोर्ट के स्टे  से कॉलेजों ने राहत की सांस ली है।

गौरतलब है कि वर्ष 2009 में गढ़वाल विवि को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला था। उस वक्त जो एक्ट पास हुआ था, उसके सेक्शन 4-एफ में ये प्रावधान किया गया था कि जो कॉलेज विवि से संबद्ध हैं, उनका स्टेटस वैसा ही रहेगा। प्रदेश के सभी राजकीय डिग्री कॉलेजों को सरकार ने इस विवि से करीब दो साल पहले असंबद्ध कराते हुए श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध करा लिया था। इसके बाद से बाकी कॉलेजों को हटाने की भी कोशिशें चल रहीं थीं। जिसके बाद गढ़वाल विवि के 30 मई को कार्य परिषद में इन्हें हटाने का निर्णय लिया गया था। जिस पर अब कोर्ट ने स्टे लगा दिया है।

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