आगामी वनाग्नि काल (फायर सीजन) 2026 की तैयारियों को परखने के लिए आज उत्तराखंड वन विभाग ने पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर ‘फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल’ का आयोजन किया। प्रदेश के सभी 41 वन प्रभागों में आयोजित इस अभ्यास के जरिए न केवल विभाग की कार्यक्षमता को जांचा गया, बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस, सेना और स्थानीय समुदायों के बीच आपसी तालमेल का भी कड़ा परीक्षण किया गया।
एकीकृत कमान केंद्र से हुई रियल-टाइम मॉनिटरिंग
इस पूरी कवायद की निगरानी मुख्यालय स्थित एकीकृत कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेंटर (ICCC) से की गई। प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) और मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबन्धन) ने खुद कंट्रोल रूम में बैठकर गतिविधियों का अनुश्रवण किया। मॉक ड्रिल को वास्तविक बनाने के लिए आईसीसीसी द्वारा अचानक 41 रैंडम ‘फायर अलर्ट’ जारी किए गए, जिसके बाद फील्ड टीमों की प्रतिक्रिया और मौके पर पहुँचने के समय (Response Time) को रिकॉर्ड किया गया।
आग की निगरानी के लिए ड्रोन प्रणाली का उपयोग किया गया, जबकि सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए वायरलेस नेटवर्क की कार्यक्षमता को परखा गया।
क्रू-स्टेशनों पर मौजूद पीपीई किट, लीफ ब्लोअर, हेलमेट और अन्य अग्निरोधक उपकरणों की उपयोगिता जांची गई।
अंतर-विभागीय समन्वय: अग्निशमन विभाग ने ‘वॉटर टेंडर’ से आग बुझाने का अभ्यास किया, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने घायलों को प्राथमिक उपचार (First Aid) देने और एम्बुलेंस के जरिए हायर सेंटर भेजने का सफल रिहर्सल किया।
इस आयोजन में केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय समुदायों की भी भारी भागीदारी रही। वन पंचायतों, महिला मंगल दलों और वनाग्नि सुरक्षा समितियों के सदस्यों ने कंधे से कंधा मिलाकर अभ्यास में हिस्सा लिया।
”इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य फायर सीजन 2026 से पहले हमारे कार्मिकों की तत्परता और संसाधनों की उपलब्धता को जांचना है। स्थानीय समुदाय और अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय ही वनों को आग से बचाने की सबसे बड़ी शक्ति है।”
— सुशांत कुमार पटनायक, मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबन्धन)
मॉक ड्रिल के अंत में सभी 40 मास्टर कंट्रोल रूम और जिला कंट्रोल रूम सक्रिय पाए गए। वन विभाग ने इस सफल आयोजन के लिए सभी सहयोगी विभागों का आभार व्यक्त किया है और प्रदेश के बहुमूल्य वनों को सुरक्षित रखने के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है।
