उत्तराखंड में उत्तरकाशी में द्रौपदी का डांडा-2 चोटी आरोहण के दौरान हिमस्खलन हादसे में बड़ा अपडेट आ रहा है। बताया जा रहा है कि इस हिमस्खलन में लापता निम के प्रशिक्षु पर्वतारोही का शव एक साल बाद बरामद हुआ है। अब हादसे में मृतकों की संख्या 28 हो गई है।  शव की पहचान नौसेना में नाविक विनय पंवार के रूप में हुई। वहीं बेटे को एक साल बाद तिरंगे में लिपटा देख परिजन बिलख पड़े। नम आंखों से जवान को अंतिम विदाई दी गई।

मिली जानकारी के अनुसार हिमस्खलन (एवलांच) की चपेट में आकर क्रेवास में दबे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्रशिक्षु पर्वतारोहियों में रायवाला के हरिपुरकलां निवासी विनय पंवार का शव द्रौपदी का डांडा क्षेत्र से बरामद हुआ है। भारतीय नौसेना में कार्यरत विनय का सपना एवरेस्ट पर चढ़ने का था। लेकिन नियती को कुछ और ही मंजूर था। विनय के परिजनों को निम की ओर से जब उनके शव मिलने की सूचना दी गई तो परिवार की उम्मीदें टूट गई। शव मिलने की सूचना के बाद से गांव का माहौल गमगीन है।

बताया जा रहा है  कि शुक्रवार को भारतीय नौ सेना की टीम विनय के शव को लेकर उसके आवास पहुंची तो बेटे को तिरंगा में लिपटा देख परिजन बिलख पड़े। यहां पार्थिव शरीर को केवल दस मिनट के लिए रखा गया। इसके बाद खड़खड़ी शमशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले सेना के जवानों ने सलामी दी। वहीं बेटे की मौत से माता नारायणी का रो-रोकर बुरा हाल है। विनय के बड़े भाई दीपक और पिता राजेंद्र पंवार उनको संभाल रहे हैं।

गौरतलब है कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के इतिहास में चार अक्तूबर 2022 वह तारीख थी जिसने निम प्रबंधन को कभी न भूलने वाला गम दिया। इस दिन निम के 34 प्रशिक्षुओं का दल द्रौपदी का डांडा-2 चोटी आरोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आ गया था।जिसमें कुल 27 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि उत्तराखंड निवासी नौसेना में नाविक विनय पंवार व हिमाचल निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक वशिष्ट लापता चल रहे थे। अब विनय पंवार का शव एक साल बाद बर्फ में दबा मिला है।

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