पिथौरागढ़

सीमांत जिले में हवाई सेवा को लेकर राजनीति चरम पर है, लेकिन रोडवेज की खस्ताहालत की ओर किसी का ध्यान नहीं है। जिले से हर रोज मात्र बीस गाड़ियां देश, प्रदेश की राजधानी के साथ बड़े शहरों के लिए रवाना हो रही हैं।

रोडवेज के पास वाहनों की भारी कमी के चलते अधिकांश यात्रियों को महंगा किराया देकर टैक्सियों से सफर करना पड़ रहा है। पिथौरागढ़ जनपद में रोडवेज बसों की संख्या मात्र 57 रह गई है। पांच वर्ष पूर्व तक रोडवेज के पास लगभग 100 बसें थी। बसों की संख्या घट जाने से जिला मुख्यालय से हर रोज केवल बीस बसें ही संचालित हो रही हैं। दिल्ली, देहरादून, लखनऊ जाने वाली बसों को अपना रूट पूरा करने में तीन दिन का समय लगता है।

पिथौरागढ़ जनपद से हर रोज बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के जवान, बडे़ महानगरों में उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा ले रहे बच्चों, व्यापारी सफर करते हैं। बसों की संख्या नाममात्र की होने से अधिकांश लोगों को टैक्सियों से ही सफर करना पड़ता है।

वर्तमान में डिपो के पास उपलब्ध 57 बसों में से भी अधिकांश की हालत खस्ता है। कई बसें पांच लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। पुरानी बसों में आए दिन ब्रेक फेल सहित तमाम समस्यायें आ रही हैं। पिछले दो माह में ही बसों के ब्रेक फेल होने के आधा दर्जन मामले हाे चुके हैं।

दीपावली का पर्व मनाने घर आये लोग अब अपने कार्यस्थलों की ओर लौट रहे हैं। रोडवेज बस स्टेशन में भारी भीड़ उमड़ रही है। बसों में जगह नहीं मिलने से कम आमदनी वाले यात्री खासे परेशान हैं।

पिथौरागढ़ डिपो के एआरएम आरएस कापड़ी के अनुसार, डिपो में बसों की संख्या कम होने के बावजूद सभी रूटों पर बसें संचालित की जा रही हैं। नई बसों के लिए उच्चाधिकारियों को डिमांड भेजी गई है। डिपो को दस नई बसें मिल जाने से व्यवस्था बेहतर हो जायेगी।

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