उत्तराखंड के इंजीनियरिंग कॉलेज घुड़दौड़ी की असिस्टेंट प्रोफेसर मनीषा भट्ट की मौत के मामले में प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। बताया जा रहा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर मनीषा भट्ट की आत्महत्या के मामले में  संस्थान के निदेशक डॉ. वाई सिंह और विभागाध्यक्ष एके गौतम को हटाया गया है। जिसके आदेश जारी किए गए है।  दोनों पर ही मनीषा के पति ने कई गंभीर आरोप हैं। मामले में जांच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार मनीषा के पति के शिकायत के आधार पर डीएम ने जो रिपोर्ट शासन को भेजी है, उसमें कई आरोप लगाए गए हैं। शासन ने घुड़दौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक और विभागाध्यक्ष कुमाऊं मंडल के इंजीनियरिंग कॉलेजों से संबद्ध कर दिया है। जारी आदेश में कहा गया है कि अप्रैल 2019 में असिस्टेंट प्रोफेसर मनीषा भट्ट की स्थायी नियुक्ति के बाद से ही उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। मनीषा की नियुक्ति के समय वर्तमान में संस्थान के निदेशक विभागाध्यक्ष थे। जबकि, एक प्रोफेसर विभागाध्यक्ष है।

रिपोर्ट में कहा गया है, मनीषा की नियुक्ति के बाद से ही उनका मानसिक उत्पीड़न शुरू कर दिया गया था। यहां तक कि उन्हें गर्भावस्था के दौरान भी छुट्टी के लिए परेशान किया गया। उन्हें बार-बार यह कहा जा रहा था कि प्रसव अवकाश तभी मंजूर होगा, जब वह वैकल्पिक प्रोफेसर की व्यवस्था कराएंगी। अवकाश न मिलने पर मनीषा ने आकस्मिक अवकाश लिया। इस बीच उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया, लेकिन उसकी भी मौत हो गई। इस सदमे से उबर कर गत 12 मई को मनीषा ने संस्थान में उपस्थिति दर्ज कराई।

कॉलेज पहुंचने पर उन्हें पता चला कि विभागाध्यक्ष ने उपस्थिति रजिस्टर से उनका नाम हटा दिया है। यहीं नहीं, आरोप है कि पदोन्नति के मामले में भी विभागाध्यक्ष ने कई बार के अनुरोध के बावजूद मनीषा की पदोन्नति की पत्रावली को आगे नहीं बढ़ाया गया। इन सबसे परेशान होकर मनीषा गत गुरुवार को अलकनंदा श्रीनगर नैथाणा झूल पुल से कूद गईं। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

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