उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। अगर यूसीसी कानून बनता है तो अल्पसंख्यकों के पर्सनल लॉ पर लगाम लगेगी और सिविल मामलों में भी सभी को एक कानून मानना पड़ेगा। सीएम धामी ने इस ड्राफ्ट के तैयार होने की बधाई दी है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। दिल्ली में ड्राफ्ट कमेटी ने इसके लिए प्रैस कॉन्फ्रेस आयोजित की थी। जिसमें ड्राफ्ट के बारे में जानकारी दी गई अब जल्द ही उत्तराखंड सरकार को रिपोर्ट फाइल कर दी जाएगी। उत्तराखंड के लिहाज से यूनिफॉर्म सिविल कोड को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बता दें कि कमेटी ने ड्राफ्ट को तैयार करने पहले कमेटी ने 20 हजार लोगों से बात की थी, वहीं कमेटी को 2.30 लाख लोगों के सुझाव भी मिले।

बताया जा रहा है कि इस ड्राफ्ट में महिलाओं को समान अधिकार देने पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसके तहत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित किसी भी धर्म से ताल्लुक रखने वाली महिलाओं को परिवार और माता पिता की संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा। उत्तराखंड में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के तहत किसी भी पुरुष और महिला को बहुविवाह करने की अनुमति नहीं होगी।

यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के प्रावधान पर भी इसमें विचार किया गया है। उत्तराखंड में लिव-इन रिश्तों में आए विवादों के बाद इसके रजिस्ट्रेशन पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही एक अहम प्रस्ताव रखा गया है कि परिवार की बहू और दामाद को भी अपने ऊपर निर्भर बुजुर्गों की देखभाल का जिम्मेदार माना जाएगा।

वहीं सीएम धामी ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार होने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा ‘ प्रदेशवासियों से किए गए वादे के अनुरूप आज 30 जून को समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने हेतु बनाई गई समिति ने अपना कार्य पूरा कर लिया है। जल्द ही देवभूमि उत्तराखण्ड में #UniformCivilCode लागू किया जाएगा।’

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