उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन और मकानों में आ रही दरारें जहां चिंता का विषय बनी हुई है। लोग क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों पर इन दरारों का आरोप लगा रहे है तो वहीं शासन ने बड़ा फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने आपदा एक्ट लागू करते हुए जोशीमठ क्षेत्र मे किसी भी तरह के निर्माण कार्यों पर अगले आदेशों तक फौरन रोक लगा दी है। जिसके आदेश जारी किए गए है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार जोशीमठ में 500 से ज्यादा घरों में दरारें आने के बाद अब तक कुल 66 परिवार जोशीमठ से पलायन कर चुके हैं। वहीं अब सिंहधार और मारवाड़ी में दरारें बढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। स्थानीय लोग एटीपीसी के सुरंग निर्माण और सड़क निर्माण के कार्यों को इसका जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जिला प्रशासन ने भी आपदा एक्ट लागू करते हुए एनटीपीसी को तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना और बीआरओ को हेलंग सड़क मार्ग निर्माण तत्काल रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।

बताया जा रहा है कि जोशीमठ-बद्रीनाथ-माना मुख्य मार्ग के पास जो पुल है वहीं पर पहाड़ी से पानी का रिसाव बड़ी तेजी हो हो रहा है। एक तेज़ धार झड़ने की तरह यहां से पानी निकलता हुआ दिख रहा है और यह कीचड़ वाला पानी है जो पहाड़ों के भीतर से आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पानी का रंग वैसा ही है जैसा त्रासदी के समय हुआ था। एनटीपीसी के बांध के लिए जो सुरंग निर्माण मे विस्फोट इस त्रासदी का प्रमुख कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह पानी पहाड़ो में टनल निर्माण के कारण हो रही ड्रिलिंग के कारण ही बाहर निकला है।

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